| क्र.सं. | विवरण (Particular) | जानकारी (Details) |
| 1 | बुवाई का समय | खरीफ: मई–जून (मानसून की शुरुआत पर) |
| 2 | बीज दर व दूरी | रोपाई धान: 20–25 किग्रा/एकड़दूरी: 20 × 15 सेमी |
| 3 | भूमि की तैयारी | 2–3 बार जुताई2 बार पडलिंगभूमि समतल होनी चाहिए |
| 4 | बीज उपचार | ब्लास्ट रोग: थीरम या कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किग्रा बीजजीवाणु झुलसा: स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम/10 लीटर पानीबीज को बुवाई से पहले 10 घंटे भिगोकर रखें |
| 5 | उर्वरक प्रयोग | 100:50:50 (NPK) किग्रा/हेक्टेयरआधार मात्रा: ½ नाइट्रोजन + पूरा फॉस्फोरस + पूरा पोटाशटॉप ड्रेसिंग: शेष ½ नाइट्रोजन 30 व 60 दिन बाद |
| 6 | सिंचाई | कल्ले निकलने एवं बालियां बनने की अवस्था में2–5 सेमी पानी बनाए रखेंकटाई से पहले पानी निकाल दें |
| 7 | खरपतवार नियंत्रण | अंकुरण-पूर्व शाकनाशी: ब्यूटाक्लोर 50% EC @ 500 ग्राम/एकड़ (20 किग्रा सूखी रेत में मिलाकर, 3 DAT)बड़े खरपतवार हाथ से निकालें |
| 8 | पौध संरक्षण | तना छेदक के लिए कार्बोफ्यूरान 3% दानेदार @ 10 किग्रा प्रति एकड़ डालें या 20 दिन बाद कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4% @ 8 किग्रा प्रति एकड़ प्रयोग करें। भूरा तना फुदका नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस.एल. @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें। ब्लास्ट रोग के लिए ट्राइसाइक्लाजोल 75% डब्ल्यूपी @ 0.6 ग्राम प्रति लीटर तथा शीथ ब्लाइट के लिए हेक्साकोनाज़ोल 5% एस.सी. @ 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। |
| 9 | कटाई | जब 85% दाने सुनहरे हो जाएं |
| 10 | कटाई उपरांत | दानों को 13–14% नमी तक सुखाएंठंडी, सूखी व साफ जगह पर भंडारण करेंउपज (आदर्श दशा): 20–25 क्विंटल/एकड़ |
| 11 | परिपक्वता अवधि | खरीफ: 130–135 दिन |
| 12 | पौधे की ऊँचाई | 85-90 सेमी |
Improved Paddy





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